पाक-अफगान शांति वार्ता विफल | ख्वाजा आसिफ ने तालिबान पर भारत से मिलीभगत का आरोप लगाया

By Ankit Jaiswal | Oct 29, 2025

इस्तांबुल में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच चल रही शांति वार्ता उस उम्मीद के साथ शुरू हुई थी कि लंबे समय से चल रहे सीमा तनाव को समाप्त करने का कोई ठोस रास्ता निकल सकता है, लेकिन मौजूद जानकारी के अनुसार यह बातचीत किसी व्यवहारिक समझौते पर पहुंचने में नाकाम रही हैं। बता दें कि इस मुलाकात की मेजबानी तुर्किये और कतर ने की थी और यह 25 अक्टूबर से चल रही थी, जबकि इससे पहले 19 अक्टूबर को दोहा में दोनों पक्षों के बीच अस्थायी युद्धविराम का ऐलान किया गया था।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कड़े शब्दों में कहा है कि वे इस स्थिति को बर्दाश्त नहीं करेंगे और यदि काबुल की तरफ से कोई हमला हुआ तो उसका जवाब “तीव्र” होगा। आसिफ ने तालिबान पर दिल्ली के इशारे पर काम करने का भी आरोप लगाया और यह भी कहा कि भारत पाकिस्तान के खिलाफ कम तीव्रता वाला संघर्ष बनाए रखने के लिए अफगानिस्तान का इस्तेमाल कर रहा है यह आरोप दोनों देशों के बीच पहले से चली आ रही आपसी आशंकाओं और प्रतिद्वंद्विता को और तीखा करता है।

हालाँकि युद्धविराम के बावजूद सीमा पर झड़पें जारी रहीं; मौजूदा रिपोर्टों के अनुसार हालिया संघर्षों में पांच पाकिस्तानी सैनिक और करीब 25 तालिबान लड़ाके मारे गए हैं, जो संकेत है कि स्थायी शांति अभी दूर की बात है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस्तांबुल वार्ता के विफल रहने से दक्षिण एशिया में अफगानिस्तान-पाकिस्तान तनाव बढ़ सकता है और इससे क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थितियाँ और जटिल हो सकती हैं।

तुर्की और कतर की मध्यस्थता में दोनों पक्षों ने आगे भी बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है, लेकिन पाकिस्तान की प्रमुख मांगों विशेषकर सीमा पार अड्डों पर कार्रवाई और आतंकी संगठन-समूहों के खिलाफ सुनिश्चित कार्यवाही पर अभी तक कोई बाध्यकारी निर्णय नहीं लिया गया है। मौजूद जानकारी के अनुसार दोनों देशों के मध्य भरोसे की कमी और बाहरी देशों के प्रभाव के आरोप शांति प्रक्रिया को गति देने में सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं।

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